Not known Details About Is mantra ke saath:

This party encourages us to produce profound connections with our inner selves, which encourages spiritual development and peace. This holy season reminds us which the Main of devotion would be the purity of our hearts and also the sincerity of our prayers.

त्रिपुर सुंदरी : श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।

नोट : उपरोक्त में से किसी एक मंत्र का ही प्रयोग करें।

तांत्रिक अनुष्ठान: इस समय में विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व होता है। यह अनुष्ठान केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में करें।

काली : ऊँ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा:।

इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.

* पितृदोष और कालसर्प here दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।

नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें और विचारों को पवित्र रखें।

अखंड दीपक जलाएं और नौ दिनों तक जलने दें।

गुप्त नवरात्रि में करें ये साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा

साधक को मनोवांछित सिद्धियां और फल प्राप्त होते हैं।

कलश के ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलावा से बांधें।

कमला : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

पूजा आरंभ करें: दीपक जलाकर देवी का आवाहन करें।

छिन्नमस्ता : श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा:।

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